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भारतीय सेना के जवान सावन बरवाल ने एशियन गेम्स में रचा इतिहास, मैराथन में 44 साल के सूखे को किया खत्म

 Written By: Abhishek Pandey
 Published : Sep 26, 2026 08:45 am IST,  Updated : Sep 26, 2026 08:45 am IST

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय धावक और सेना में जवान सावन बरवाल ने मैराथन में सिल्वर मेडल जीतने के साथ 44 सालों में पहले ऐसे भारतीय बन गए हैं जो एशियन गेम्स में मैराथन में पदक जीतने में कामयाब हो सके हैं।

Sawan Barwal- India TV Hindi
सावन बरवाल Image Source : AFP

जापान के आइची नागोया में चल रहे एशियन गेम्स 2026 में 26 सितंबर के दिन की शुरुआत भारत के लिए काफी ऐतिहासिक रही, जिसमें भारतीय सेना में जवान सावन बरवाल ने मैराथन में सिल्वर मेडल को अपने नाम किया। सावन ने पुरुष मैराथन में सिल्वर मेडल जीतने के साथ नया नेशनल रिकॉर्ड भी बना दिया। वहीं इसके अलावा भारत के लिए एशियन गेम्स में पुरुष मैराथन के इवेंट में 44 साल बाद पहला पदक है। भारत ने पिछली बार मैराथन में एशियन गेम्स में पदक साल 1982 के एशियाई खेलों में जीता था। सेना के 28 वर्ष के खिलाड़ी बरवाल ने दो घंटे 11 मिनट 37 सेकंड में 42.195 किलोमीटर की मैराथन पूरी की करने के साथ सिल्वर मेडल को अपने नाम किया।

सावन सिर्फ 48 सेकेंड से गोल्ड जीतने से चूके

मैराथन के इवेंट में सावन बरवाल ने जहां सिल्वर मेडल अपने नाम किया तो वहीं इस इवेंट में गोल्ड मेडल जापान के इचिताका यामाशिता ने जीता जिन्होंने सावन से 48 सेकेंड पहले यह मैराथन पूरी की वहीं चीन के पेइयू फेंग दो घंटे 12 मिनट 13 सेकेंड के समय के साथ तीसरे स्थान पर रहे। एशियाई खेलों में मैराथन में इससे पहले साल 1982 में दिल्ली में होसुर कुक्काप्पा सीतारन ने भारत को कांस्य पदक दिलाया था। बरवाल एशियाई खेलों में मैराथन में मेडल जीतने वाले चौथे भारतीय भी बन गए। इससे पहले दिल्ली में साल 1951 में पहले एशियाई खेलों में छोटा सिंह ने स्वर्ण और सूरत सिंह माथुर ने कांस्य पदक जीता था। बरवाल ने 5000 मीटर, 10000 मीटर और हाफ मैराथन दौड़ने के बाद इसी साल मैराथन में पदार्पण किया था। अप्रैल में बरवाल ने रॉटरडम में एनएन मैराथन में शिवनाथ सिंह का 48 साल पुराना दो घंटे 11 मिनट 58 सेकेंड का नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा था।

मेरा लक्ष्य पदक जीतना था

सावन बरवाल ने सिल्वर मेडल जीतने के बाद जहां अपनी खुशी को जाहिर किया तो वहीं उन्होंने कहा कि मेरा लक्ष्य पदक जीतना था, अपना रिकॉर्ड बेहतर करना नहीं, लेकिन यह भी राष्ट्रीय रिकॉर्ड है। मुझे खुशी है कि इतने लंबे समय बाद देश के लिये पदक जीत सका। मेरा लक्ष्य 39.40 किलोमीटर तक पहले ग्रुप में रहना था। मैं पहले ग्रुप में रहा और आखिरी एक दो किलोमीटर में फिनिश करने का फैसला किया। आखिर में 38.37 किलोमीटर में तीन ही रनर थे। मैंने एक सी रफ्तार बनाये रखने की कोशिश की। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के बरवाल के पिता दिल्ली में ड्राइवर का काम करते थे और मां सुभद्रा देवी गृहिणी है। सुनील बरवाल साल 2019 में खेल कोटे से अपने भाई के साथ भारतीय सेना में शामिल हुए थे।

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